फंडामेंटल ऑफ कंप्यूटर – Computer Fundamental in Hindi

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यदि आप एक कंप्यूटर छात्र (Computer Student) हैं या आप किसी प्रतियोगी परीक्षा (Competitive Exam) की तैयारी कर रहे हैं, तो ” फंडामेंटल ऑफ कंप्यूटर (Computer Fundamental in Hindi)” के बारे में जानना बहुत जरूरी है। क्योंकि जब आप एक प्रतियोगी परीक्षा देते हैं, तो आपसे कंप्यूटर फंडामेंटल से प्रश्न पूछे जाएंगे।

अब, सभी सरकारी और गैर-सरकारी संगठनों में, कंप्यूटर का बुनियादी ज्ञान ( (Computer Basic Knowledge in Hindi)) यानी कंप्यूटर फंडामेंटल के वारे में जानकारी अनिवार्य हो गया है।

इसी बात को ध्यान में रखते हुए, आज हम आपको कंप्यूटर फंडामेंटल (Computer Fundamental in Hindi) के अंतर्गत आने वाले महत्वपूर्ण बिषयों के बारे में जानकारी देंगे जैसे कि,  Computer क्या हैComputer के प्रकारComputer कैसे काम करता हैComputer का इतिहासजनरेशन ऑफ ComputerComputer की विशेषताएंहार्डवेयर और सॉफ्टवेयरइनपुट and आउटपुट Device, Computer के फायदे और नुकसान को जानेंगे, इन सभी बिषय को जानने के बाद आप फंडामेंटल ऑफ कंप्यूटर (Computer Fundamental in Hindi) से जुड़ी सारे Questions की answer दे सकेंगे।

Modern Computer कई वर्षों की Hard Work (कड़ी मेहनत), अद्भुत आविष्कारों और दुनिया भर के शोधकर्ताओं (Researchers) और संगठनों (Organizations) द्वारा खोंज का परिणाम हैं।

जिसका परिणाम बर्तमान में Modern Computer हैं, जिसको आजकल हम सभी Use कर रहे हैं। आइए अब हम Modern Computer (आधुनिक कंप्यूटर) के बारे में विस्तार से जानते हैं। कंप्यूटर शब्द अंग्रेजी में “कंप्यूट” (Compute) शब्द से लिया गया है, जिसका अर्थ है “गणना”, यही कारण है कि इसे कंप्यूटर (Computer) कहा जाता है। एक कंप्यूटर एक इलेक्ट्रॉनिक मशीन (Electronic Machine) है जिसका उपयोग Information Storage और उसको processing करने के लिए किया जाता है। जैसा कि हम सभी जानते हैं कि कंप्यूटर (Computer) अपने आप काम नहीं कर सकता है, यह उपयोगकर्ता (User) के द्वारा दिए गए निर्देशों (Instructions) के अनुसार काम करता है।

कंप्यूटर काम कैसे करता है? (How Computer Works in Hindi)

कंप्यूटर (Computer) एक बहुत ही जटिल मशीन है, लेकिन मूल रूप से, यह इनपुट >> प्रोसेस >> आउटपुट (IPO) मॉडल को अनुसरण (Follow) करके काम करता है। Computer (कंप्यूटर) एक Electronic Machine (इलेक्ट्रॉनिक मशीन) है जो पहले Data (डेटा) को स्वीकार करता है, उसके बाद यह User के Instructions के अनुसार उसे Process करता है, और उसके बाद यह हमें Output देता है। इनपुट >> प्रोसेस >> आउटपुट (IPO) Model सिस्टम, सबसे ज्यादा System Analysis और Software Engineering में Use किया जाने वाला मॉडल है।

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Input (इनपुट): Input Device एक Hardware Device है जो Computer (कंप्यूटर) को Data भेजने के लिए काम में आता है, जिसको Use करके आप कंप्यूटर के साथ interact और उसे Control कर सकते हैं।
Computer पर सबसे अधिक Use होने बाला Input Device (इनपुट डिवाइस) Keyboard और Mouse हैं।
हालाकि और भी बोहोत सारि डिवाइस हैं जिसको इनपुट डिवाइस के रूप में यूज़ किया जा सकता हैं।

Process (प्रक्रिया): इनपुट डिवाइस से प्राप्त डेटा को Central Processing Unit (CPU) के द्वारा उसे Process किया जाता है। CPU का काम Instructions को Process करना, Calculation (गणना) करना है।

Central Processing Unit (CPU) के दो महत्तपूर्ण Component होते है:

  1. Arithmetic logic unit (अर्थमेटिक लॉजिक यूनिट) : यह Mathematical और Logic (लॉजिक) सम्बंधित क्रियाकलापों को Process (प्रोसेस) करता है।
  2. कंट्रोल यूनिट (CU) : यह Computer के सभी कार्यों को Control करता है, और Computer की सभी गतिविधियों जैसे Input, Output Device, Processor आदि के बीच में तालमेल बनाकर रखता हैं।
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Output (आउटपुट): Data Process होने के बाद, Output Devices के माध्यम से रिजल्ट को Output किया जाता हैं । सरल शब्दों में, आउटपुट प्रोसेसिंग के बाद प्राप्त होने वाला परिणाम है। Output Device आपके साथ Computer को Interact करने के लिए सक्षम बनता हैं। ये डिवाइस Output को Computer स्क्रीन पर प्रदर्शित करता हैं, आपकी Data को Print कर सकता हैं , या ध्वनि (Sound) उत्पन्न कर सकता हैं। इनमें से कुछ आउटपुट डिवाइस Monitor, Printer, Speaker और Head Phone हैं।

Storage (भंडारण): Computer के अंदर या बाहर Computer द्वारा प्राप्त रिजल्ट को सुरक्षित जमा करने के लिए उपयोग किए जाने वाले उपकरणों को Storage Device के रूप में जाना जाता है। हार्ड डिस्क ड्राइव (HDD), सॉलिड स्टेट ड्राइव (SSDs) और USB फ्लैश ड्राइव (USB) सबसे Storage Device डिवाइस में से हैं।

कंप्यूटर का इतिहास (History of Computer in Hindi)

Computer का इतिहास आदिम युग से पहले का है, जब मनुष्यों को एक उपकरण की आवश्यकता होती थी, जो उन्हें आसानी से अपने मवेशियों की गिनती करने और दैनिक जीवन में उपयोग की जाने वाली गणनाओं को समझने में हेल्प करता था । तब से, मनुष्य Modern Computer बनाने की कोसिस कर रहा हैं, जो और तेजी से अधिक सटीक और स्वचालित गणना कर सकें।

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Computer Fundamental in Hindi

कहा जाता है कि आवश्यकता ही आविष्कार की जननी है। Computer के लिए भी यही सच है। Computer का इतिहास विशेष रूप से मवेशियों की गिनती रखने की आवश्यकता से शुरू होता है। जल्द ही, उन्होंने एक Number System की अबिष्कार की और गिनती करने के लिए कंकड़ का उपयोग करना शुरू कर दिया। 3000 ईसा पूर्व में, चीन (China) ने Abacus Number System विकसित किया, जिसे मानव जाति द्वारा किए गए पहले Number System के रूप में देखा जाता है।

फिर 1617 ई. में, स्कॉटिश गणितज्ञ John Napier (जॉन नेपियर) ने Napier’s Bones (नेपियर बोन्स) नाम का एक Manual Number System विकसित किया, जिसके आधार पर आज के Computer विकसित हुए हैं। आधुनिक कंप्यूटर मुश्किल से 50 साल पुराने हैं, लेकिन उनका विकास का इतिहास बहुत पुराना है। Computer हमारे जीवन के हर पहलू में किसी न किसी तरह से शामिल हैं। पिछले चार दशकों में, Computer ने हमारे समाज में रहने और काम करने के तरीके को बदल दिया है।

नीचे हमने Computer इतिहास की समय-सीमा को समझाया है

Abacus (अबेकस) >> इसका आविष्कार चीन में हुआ था। Abacus लकड़ी के फ्रेम और गोलाकार मोतियों से बना एक गिनती यंत्र है और इसका उपयोग जोर(+), घटा(-), विभाजन(%) और गुणन(X) के लिए किया जाता है।

Napier’s Bones (नेपियर्स बोन्स)>> इस उपकरण में जानवरों की हड्डियों से बनी आयताकार पट्टियाँ होती थीं, जो कि Manual रूप से संचालित गणना उपकरण है। जिसका आविष्कार स्कॉटिश गणितज्ञ जॉन नेपियर (John Napier) ने किया था।

Pascaline (पास्कलीन)>> Pascaline एक Mechanical Calculator (मैकेनिकल कैलकुलेटर) है जिसका उपयोग जोड़ने, घटाने और गिनती करने के लिए किया जाता है। जिसका आविष्कार Blaise Pascal (ब्लेज़ पास्कल) ने 17 वीं शताब्दी में किया था।

Stepped Reckoner (लेबनीज का मैकेनिकल कैलकुलेटर) >> यह एक Digital Mechanical Calculator (डिजिटल मैकेनिकल कैलकुलेटर) है जिसका आविष्कार जर्मन गणितज्ञ Gottfried Wilhelm Leibniz (गॉटफ्रीड विल्हेम लिबनीज) द्वारा किया गया है । यह एक ऐसी मशीन है जो गुणा और भाग कर सकती है । इस मशीन को Stepped Reckoner (स्टेप्ड रेकनर) भी कहा जाता है।

Jacquard Loom (जैक्वार्ड लूम) >> यह पहला मैकेनिकल Loom (करघा) था। इस मशीन में, बुनाई के डिजाईन डालने के लिए छिद्रित कार्ड का उपयोग किया जाता था । इसका आविष्कार 1801 में Joseph Marie Jacquard (जोसेफ मैरी जैक्वार्ड) द्वारा किया गया था।

Difference Engine (डिफरेंस इंजन) >> Difference Engine एक Mechanical Calculator था । जिसे 1822 में Charles Babbage (चार्ल्स बैबेज) द्वारा विकसित किया गया था। यह संख्याओं के कई सेटों की गणना करने और परिणामों की हार्ड कॉपी बनाने में सक्षम है । यह मशीन Shaft (शाफ्ट) और Gear (गियर) से लैस थी और यह मशीन भाप से चलती थी।

Analytical Engine (एनालिटिकल इंजन) >> यह एक Mechanical Machine (मैकेनिकल मशीन) था। जिसे 1830 के दशक में, अंग्रेजी गणितज्ञ Charles Babbage (चार्ल्स बैबेज) द्वारा डिजाइन किया गया था, जो दुनिया का पहला General Purpose Computer डिजाइन था।

Tabulating Machine (टेबुलेटिंग मशीन) >> टेबुलेटिंग मशीन एक Electromechanical (इलेक्ट्रोमैकेनिकल) मशीन है, जिसमें पियर्सिंग कार्ड द्वारा नंबर रीडिंग की जाती है। इसका आविष्कार Herman Hollerith (हरमन होलेरिथ) ने किया था, Herman Hollerith ने Tabulating Machine कंपनी की स्थापना की, जो बाद में IBM नामक कंपनी बन गई।

Mark-1 (मार्क -1) >> 1944 में Harvard University (हार्वर्ड विश्वविद्यालय) में निर्मित एक कंप्यूटर, Mark 1, दुनिया का पहला Electro mechanical (इलेक्ट्रो-मैकेनिकल) कंप्यूटर था।

ENIAC >> यह पहला Digital Computer (डिजिटल कंप्यूटर) था। इसे United States ARMY की Ballistic Research Laboratory (बैलिस्टिक रिसर्च लेबोरेटरी) के लिए Artillery Firing (आर्टिलरी फायरिंग) टेबल की गणना करने के लिए Pennsylvania University (पेन्सिलवेनिया विश्वविद्यालय) में John Presper Eckert (जॉन प्रेपर एकर्ट) और John Mauchly (जॉन मौचली) द्वारा आविष्कार किया गया था। ।

EDVAC >> यह उन दिनों पहला Electronic Computer’s (इलेक्ट्रॉनिक कंप्यूटरों) में से एक है, जो एक Binary Number System (बाइनरी सिस्टम) का उपयोग करता था । यह कंप्यूटर 30-टन भारी, और 150-फुट चौड़ा कंप्यूटर था । यह बड़ी गणनाएँ कर सकता था।

UNIVAC >> यह संयुक्त राज्य America (अमेरिका) में निर्मित पहला Commercial Computer (व्यावसायिक कंप्यूटर) था । यह मुख्य रूप से John Presper Eckert (जॉन प्रिपर एकर्ट) और John Mauchly (जॉन मौचली) द्वारा डिज़ाइन किया गया था, जो ENIAC के आविष्कारक थे।

जनरेशन ऑफ कंप्यूटर (Generation of Computer in Hindi)

Computer Technology में 1940 से कई बदलाव हुए हैं, जिनके बारे में कहा जा सकता है कि इससे Advance Computer’s के विकास में एक बड़ी क्रांति आई है । कंप्यूटर में उपयोग की जाने वाली तकनीक के अनुसार, हम कंप्यूटर को पांच प्रमुख पीढ़ियों में भाग कर सकते हैं । कंप्यूटर के विकास का मुख्य उद्देश्य हैं तेजी से प्रक्रिया करना (Fast Processing), आकार में छोटा होना (Small Size), अधिक स्टोरेज क्षमता होना (High Storage Capacity) और कम लागत (Low Cost) होना है।

First Generation of Computer (कंप्यूटर की पहली पीढ़ी) >> Computer की पहली पीढ़ी की शुरुआत 1951 में UNIVAC-1 के आविष्कार से हुई थी । उन Computer’s में Vacuum Tubes (वैक्यूम ट्यूब) का इस्तेमाल किया गया था । यह Computer बड़ा आता था और अधिक गर्मी पैदा करता था । जिसे ठंडा रखने के लिए एक Air-Conditioning Machine (वातानुकूलित मशीन) का उपयोग करना पड़ता था, और बड़ी मात्रा में बिजली खर्च होती थी।

Second Generation of Computer (दूसरी पीढ़ी का कंप्यूटर) >> दूसरी पीढ़ी के Computer’s में Vacuum Tube की जगह Transistor (ट्रांजिस्टर) का इस्तेमाल किया जाता था । यह Computer पहली पीढ़ी के कंप्यूटरों की तुलना में तेज था और उनकी Processing क्षमता भी तेज थी । इस समय के दौरान व्यापार की दुनिया और उद्योग में Computer का उपयोग शुरू हुआ और नई Programming Languages का विकास हुआ।

Third Generation of Computer (कंप्यूटर की तीसरी पीढ़ी) >> Computer की तीसरी पीढ़ी में, ट्रांजिस्टर के बजाय, IC (Integrated Circuit) का उपयोग किया गया था, जो कि 1958 में J.S. Kilby (जे.सी. किलवी) द्वारा विकसित किया गया था । इसमें LSI तकनीक का इस्तेमाल किया गया था। जिसमें एक Silicon Semiconductor (सिलिकॉन सेमीकंडक्टर) माइक्रोचिप पर हजारों Transistor (ट्रांजिस्टर) का उपयोग किया गया था । जिसे Large-Scale Integration (LSI) के रूप में जाना जाता है । यह पहली पीढ़ी और दूसरी पीढ़ी के कंप्यूटरों की तुलना में बहुत तेजी से काम करता था, वे आकार में छोटे थे और लागत कम थी।

Fourth Generation of Computer (चौथी पीढ़ी का कंप्यूटर) >> Fourth Generation के कंप्यूटर में, LSI IC की जगह VLSI का उपयोग किया गया था, जिसमें एक सिलिकॉन चिप में हजारों IC (Integrated Circuit) का उपयोग किया गया था । Very Large-Scale Integration (VLSI) तकनीक के प्रयोग से Microprocessor (माइक्रोप्रोसेसर) का निर्माण हुआ, जिसने Computer के आकार और क्षमता में वृद्धि हुई । Graphical User Interface (GUI) इस समय के दौरान विकसित किया गया था, जिससे कंप्यूटर का उपयोग करना आसान हो गया ।

Fifth Generation of Computer (कंप्यूटर की पांचवीं पीढ़ी) >> इस पीढ़ी के कंप्यूटर VLSI के बजाय ULSI (Ultra Large Scale Integration) का उपयोग कर रहे हैं, और आज एक Chip (चिप) के साथ अरबों की गणना करना संभव है । पांचवीं पीढ़ी के कंप्यूटर बहुत छोटे और तेज काम करते हैं । पांचवीं पीढ़ी में, Artificial Intelligence, Voice Recognition, Virtual Reality, Internet और Fiber Optic Network के क्षेत्र में तकनीकी विकास का विस्तार हुआ है।

कंप्यूटर की विशेषताएं (Characteristics of Computer)

  • यह तेजी से काम करता है जो समय बचाता है।
  • कंप्यूटर बिना त्रुटि के सभी काम करता है। यह कार्य पूरा करने में कोई गलती नहीं करता है।
  • यह Permanent और बड़ी Storage क्षमता प्रदान करता है।
  • कंप्यूटर एक साथ विभिन्न प्रकार के कार्य कर सकते हैं। वे एक ही समय में कई कार्य कर सकते हैं।
  • आप Login System, Password Protection और Encryption के साथ अपनी संवेदनशील जानकारी की सुरक्षा कर सकते हैं।

कंप्यूटर कितने प्रकार के होते हैं? (Types of Computer in Hindi)

Computer कई प्रकार के होते हैं । कई कंप्यूटर आपके हाथ का हतिले के साइज का हो सकता हैं, और कई कंप्यूटर एक घर की एक कमरा की साइज का भी हो सकता हैं । आपके घर में आपके द्वारा उपयोग किए जाने वाले कंप्यूटर का प्रकार भी एक प्रकार का Computer (कंप्यूटर) है, जिसे आमतौर पर Micro Computer (माइक्रो कंप्यूटर) या Personal Computer (PC) के रूप में जाना जाता है। आकार और प्रकार की तुलना में कंप्यूटर एक दूसरे से पूरी तरह अलग हैं । इसलिए कंप्यूटर के प्रकार को वर्गीकृत करना मुश्किल है, लेकिन हम Data Processing Speed, Size और अनुप्रयोगों के आधार पर वर्गीकृत कर रहे हैं । मुख्य रूप से Computer’s निम्न प्रकार के होते हैं।

  • On the Basis of Size (आकार के आधार पर)
  1. Microcomputer (माइक्रो कंप्यूटर)
  2. Minicomputer (मिनी कॉम्पुटर)
  3. Mainframe Computer (मेनफ्रेम कंप्यूटर)
  4. Supercomputer (सुपर कंप्यूटर)
  • On the Basis of Applications (अनुप्रयोग के आधार पर)
  1. Analog Computer (एनालॉग कंप्यूटर)
  2. Digital Computer (डिजिटल कम्प्यूटर)
  3. Hybrid Computer (हाइब्रिड कंप्यूटर)

हार्डवेयर एंड सॉफ्टवेयर क्या है? (Hardware and Software in Hindi)

एक कंप्यूटर दो भागों से बना होता है >> Hardware (हार्डवेयर) और Software (सॉफ्टवेयर) अभी हम इन दोनों के बारे में जानेंगे।

  • Hardware (हार्डवेयर) >> कंप्यूटर के वे सभी भाग जिन्हें आप देख सकते हैं, महसूस कर सकते हैं और स्पर्श कर सकते हैं, उन सभी को Computer Hardware (कंप्यूटर हार्डवेयर) कहा जाता हैं । इन उपकरणों को Peripheral Device (पेरिफेरल डिवाइस) के रूप में भी जाना जाता है। CPU, कीबोर्ड, मॉनिटर, माउस, मॉडेम, CD-ROM, आदि सभी हार्डवेयर के उदाहरण हैं।
  • Software (सॉफ्टवेयर) >> Software, Programming Language (प्रोग्रामिंग भाषा) में लिखे गए Instructions (निर्देशों) का एक समूह होता है, जो Programs (प्रोग्रामों) का एक सेट है और जो Computer System के कार्यों को Control (नियंत्रित) करता है, और Computer के विभिन्न हार्डवेयर के बीच Balance (समन्वय) स्थापित करता है ताकि एक विशेष कार्य पूरा किया जा सके।

इनपुट एंड आउटपुट डिवाइस (Input and Output Devices in Hindi)

इनपुट / आउटपुट डिवाइस जिन्हें I/O डिवाइस के रूप में जाना जाता है। यह कंप्यूटर और उसके उपयोगकर्ता (User) के बीच Communication (संचार) का एक साधन प्रदान करते हैं।

  • Input Device (इनपुट डिवाइस) >> एक इनपुट डिवाइस का इस्तेमाल डाटा और जानकारी को कंप्यूटर में इनपुट करने के लिए किया जाता है। Keyboard (कीबोर्ड), Mouse (माउस) और Scanner (स्कैनर) आम इनपुट डिवाइस के उदाहरण हैं।
  • Output Device (आउटपुट डिवाइस) >> कंप्यूटर द्वारा प्राप्त परिणामों को देखने या प्राप्त करने के लिए एक आउटपुट डिवाइस का उपयोग किया जाता है। सामान्य आउटपुट डिवाइस के उदाहरण Monitor (मॉनिटर), Printer (प्रिंटर) और Speaker (स्पीकर) हैं।

कंप्यूटर के अनुप्रयोग (Application of Computer in Hindi)

कंप्यूटर का उपयोग कई क्षेत्रों में किया जाता है। जैसे कि:

  • शिक्षा के क्षेत्र में (Education)
  • बैंकिंग के क्षेत्र में (Banking)
  • वैज्ञानिक अनुसंधान के क्षेत्र में (Scientific Research)
  • चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में (Medical Science)
  • रक्षा के क्षेत्र में (Defence)
  • संचार के क्षेत्र में (Communication)
  • मनोरंजन के क्षेत्र में (Entertainment)
  • व्यवसाय के क्षेत्र में (Business)
  • प्रकाशन के क्षेत्र में (Publication)
  • सुरक्षा के क्षेत्र में (Security)

कंप्यूटर के फायदे और नुकसान (Advantages and Disadvantages of Computer in Hindi)

कंप्यूटर के फायदे निम्नलिखित हैं >>

  • समय की बचत – कंप्यूटर की मदद से हम अपने कई कार्यों को कुछ घंटों या मिनटों में पूरा कर सकते हैं, जिन्हें पूरा करने में हमें दिन या महीने लगते हैं । इससे हमारा समय बचता है।
  • पैसे की बचत – कंप्यूटर अकेले कई लोगों का काम बिना किसी त्रुटि के कर सकता है, जो आपके पैसे बचाता है।
  • उत्पादकता में वृद्धि – उत्पादकता बढ़ाने के लिए विभिन्न उद्योगों में कंप्यूटर से चलने वाली मशीनों का उपयोग किया जा सकता है। ताकि कम लागत में अधिक उत्पादन किया जा सके।
  • रोजगार में वृद्धि – कंप्यूटर ने कई नए क्षेत्रों में रोजगार के अवसर प्रदान किए हैं क्योंकि कंप्यूटर हमारे द्वारा दिए गए निर्देशों पर काम करता है।
  • जीवन स्तर में सुधार – कंप्यूटर के उपयोग के कारण, समाज के जीवन की गुणवत्ता में बहुत सुधार हुआ है, क्योंकि इंटरनेट, संचार का सबसे अच्छा माध्यम बन गया है, ऑनलाइन बैंकिंग के माध्यम से घर पर बैठे पैसे का आदान-प्रदान किया जा सकता है, जो आपके समय की बचत करता है।

कंप्यूटर के नुकसान निम्नलिखित हैं >>

  • समय की बर्बादी – कुछ लोग कंप्यूटर का दुरुपयोग कर रहे हैं, वे सारा दिन सोशल मीडिया पर बिताते हैं, कंप्यूटर गेम खेल रहे हैं, ऑनलाइन वीडियो और फिल्में देख रहे हैं और अपना समय बर्बाद कर रहे हैं।
  • आँखों में कमजोरी – कंप्यूटर का अत्यधिक उपयोग आँखों को शुष्क बनाता है, जो हमारी आँखों के लिए हानिकारक है और आँखों को कमजोर करने का असली कारण है। साथ ही, आंखों पर अधिक दबाव डालने के लिए कंप्यूटर का उपयोग करने से भी आंखों की रोशनी कम होती है।
  • कमर और सिरदर्द – कमर दर्द और सिरदर्द कंप्यूटर के लंबे समय तक इस्तेमाल के कारण होने वाली एक आम समस्या है। इसलिए, आपको एक ब्रेक लेना चाहिए।
  • अनिद्रा और अवसाद – वैज्ञानिक शोध से पता चला है कि 5 घंटे से अधिक समय तक कंप्यूटर चलाने वालों में अनिद्रा की शिकायत अधिक पाई जाती है। साथ ही, कंप्यूटर पर अधिक समय बिताने से अवसाद जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं भी हो सकती हैं।
  • गोपनीयता का खतरा – हम अपनी सभी फ़ाइलों या किसी भी संवेदनशील डेटा को कंप्यूटर में रखते हैं और उन्हें साझा करने के लिए इंटरनेट का उपयोग करते हैं, लेकिन इस तकनीकी युग में, हम अक्सर यह भूल जाते हैं कि कोई भी तकनीक 100% सुरक्षित नहीं है। है। इस बीच, यदि हमारा डेटा गलत हाथों में पड़ता है, तो यह हमारी गोपनीयता के लिए बहुत खतरनाक हो सकता है।

निष्कर्ष (Conclusion)

दोस्तों, जैसा कि हमने ऊपर पढ़ा है, सभी सरकारी और गैर-सरकारी संगठनों में कंप्यूटर का ज्ञान अनिवार्य हो गया है। साथ ही, विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में अनिवार्य कंप्यूटर परीक्षा दी जा रही है । इसलिए, “फंडामेंटल ऑफ कंप्यूटर (Computer Fundamental in Hindi)” के बारे में जानना बहुत जरूरी है। मुझे उम्मीद है कि यह पोस्ट आपके लिए बहुत उपयोगी साबित होगी, और इसे पढ़ने से निश्चित रूप से आपके कंप्यूटर ज्ञान में वृद्धि होगी। फिर भी अगर आपका कोई सवाल है तो आप Comment (कमेंट) कर सकते हैं, अगर आपको यह पोस्ट पसंद आई हो तो इसे Social Media (सोशल मीडिया) जरूर पर शेयर करें।

Bijoy Goswami
में एक Professional Blogger हूँ, और में 2016 से Blogging कर रहा हूँ. में इस Blog की माध्यम से अपना Experiance आप लोगो तक शेयर करने की कोसिस करूँगा, ताकि मुझे Blogging करते समय जो मुशकिलो की सामना करना परा था वोह आप लोगो को करना ना पड़े. तोह चलिए Blogging करते हैं & बोहोत सारा पैसा कमाते हैं 🤘